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रक्तदान-महादान

‘‘रक्तदान-महादान’’ 
शास. डाॅ. वा.वा. पाटणकर कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय दुर्ग में रेड रिबन क्लब छत्तीसगढ़ राज्य एड्स नियंत्रण समिति एवं यूथ रेडक्राॅस के संयुक्त तत्वाधान में ‘‘रक्तदान-महादान’’ जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञ श्री सुदीप श्रीवास्तव, प्रमुख सलाहकार, राज्य रेडक्राॅस सोसायटी, रायपुर छत्तीसगढ़, सुश्री नीतू मंडावी, प्रभारी राज्य एड्स कन्ट्रोल रायपुर छत्तीसगढ़ उपस्थित थे। संयोजक एवं यूथ रेडक्राॅस प्रभारी डाॅ. रेशमा लाकेश ने बताया कि रक्तदान से संबंधित भ्रांतियों को दूर कर इस शुभ दान की ओर प्रेरित करने हेतु, यह आयोजन किया गया है क्योंकि आमतौर पर यह माना जाता है कि रक्तदान से शारीरिक कमजोरी आ जाती है परन्तु कुछ विशेष परिस्थितियों को छोड़ दे तो सभी स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकते है।
कार्यक्रम के मार्गदर्शक महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. सुशील चन्द्र तिवारी ने अपने संबोधन में कहा कि - रक्तदान ऐसा दान है जो हर कोई कर सकता है परंतु इसके लिए पहले स्वयं का स्वस्थ होना अत्यंत आवश्यक है। रक्तदान से जीवनदान दिया जा सकता है। 
रेडक्राॅस वालेन्टियर कु. रानूू टिकरिया ने कहा कि रक्तदान से किसी व्यक्ति की जान बच सकती है, युवा पीढ़ी भली-भांति जान ले कि रक्तदान के तुरन्त बाद ही शरीर में बोनमेरू नये टिशू बनाते है अतः जागरूक एवं सशक्त बनकर हमें रक्त दान करना चाहिए। 
सुश्री नीतू मण्डावी ने कहा कि - एचआईव्ही फैलने के चार कारणों में से एक प्रमुख  इनफेक्टेड ब्लड है साथ ही निडिल, सीरींज, इन्फेक्टेड माँ से बच्चे को एवं असुरक्षित यौन संबंध है।   
श्री सुदीप श्रीवास्तव ने अपने उद्बोधन में कहा कि स्वैच्छिक रक्तदान करने के लिए प्रेरित करना चाहिये क्योंकि रक्तदान करने से डर जागरूकता की कमी है। परन्तु रक्तदान करने से पहले जांच होती है ततपश्चात् ही रक्त लिया जाता है। उन्होनें छात्राओं को उत्साहित करते हुए रक्तदान हेतु प्रेरित किया।  
श्रीमती ज्योति भरणे ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापक, कर्मचारी एवं छात्रायें बड़ी संख्या में उपस्थित थे। 

 
 
 

विश्व मधुमेह दिवस मनाया गया हमारी दिनचर्या ही मधुमेह से बचाव का ईलाज है:- डाॅ. शिवेन्द्र श्रीवास्तव

शास. डाॅ. वा.वा. पाटणकर कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय दुर्ग में यूथ रेडक्राॅस के तत्वाधान में विश्व मधुमेह दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। 
इस अवसर पर मधुमेह के संबंध में सारगर्भित जानकारी से अवगत कराने डाॅ. शिवेन्द्र बहादुर श्रीवास्तव का व्याख्यान आयोजित किया गया। 
यूथ रेडक्राॅस प्रभारी डाॅ. रेशमा लाकेश ने बताया कि मधुमेह के संबंध में अपना उद्बोधन देते हुए डाॅ. श्रीवास्तव ने कहा कि भारत में सर्वाधिक मधुमेह के पीड़ित है तथा प्रदेश में दुर्ग-भिलाई में सर्वाधिक मधुमेह के रोगी है। उन्होनें छात्राओं को मधुमेह के लक्षणों तथा उससे प्रभावित होने वाले अंगों के संबंध में वैज्ञानिक तथ्यों सहित महत्वपूर्ण जानकारी दी। शरीर के विभिन्न अंग हार्मोन्स के द्वारा प्रभावित होते है। मधुमेह में भी इसकी अधिकता आँख, किडनी, हृदय को सर्वाधिक प्रभावित करती है। इसके बचाव के लिये हमारी दिनचर्या का नियन्त्रण ही श्रेष्ठकर उपाय है। उन्होनें कहा कि मधुमेह की जानकारी बताते ही हमारे सलाहकारों की संख्या बढ़ जाती है। विभिन्न प्रकार के नुस्खों से हम दिगभ्रमित हो जाते है और बीमारी कम होने की बजाय बढ़ती जाती है। हमारा आलस्य और लापरवाही मधुमेह को जन्म देती है। डाॅ. श्रीवास्तव ने कहा कि खाना मना नहीं है बल्कि खाने पर नियंत्रण जरूरी है।    
महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. सुशील चन्द्र तिवारी ने कहा कि दिनचर्या के नियंत्रित होने से मधुमेह भी स्वभाविक तौर पर नियंत्रित हो जाता है। 
स्पर्श हाॅस्पिटल के अधिकारी अभिषेक जैन ने भी हाॅस्पिटल में उपलब्ध विभिन्न सुविधाओं एवं योजनाओं की जानकारी दी। 
इस अवसर पर छात्राओं ने विभिन्न प्रश्नों के माध्यम से अपनी जिज्ञासाओं को शांत किया। संगोष्ठी का संचालन डाॅ. रेशमा लाकेश ने किया। 
कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापक, कर्मचारी एवं छात्रायें बड़ी संख्या में उपस्थित थे। 

 
 
 

प्री-मैराइटल काउन्सलिंग फाॅर गर्ल्स

प्री-मैराइटल काउन्सलिंग फाॅर  गर्ल्स

शास. डाॅ. वा.वा. पाटणकर कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय में यूथ रेडक्राॅस इकाई के तत्वाधान से प्री-मैराइटल काउन्सलिंग फाॅर गल्र्स का आयोजन किया गया। 
संयोजक एवं यूथ रेडक्राॅस प्रभारी डाॅ. रेशमा लाकेश ने बताया कि काउन्सलिंग के माध्यम से युवा छात्राओं को विवाह के पूर्व काउन्सलिंग कर सशक्त व स्वस्थ रिश्तों को आरम्भ कर स्थायी एवं संतुष्ट वैवाहिक जीवन प्रदान किया जाता है। इसके द्वारा स्वयं के कमजोर पक्षों का भी ज्ञान होता है, जो कि विवाह के बाद प्रायः समस्या उत्पन्न कर विवाह विच्छेद जैसे कारणों को जन्म देता है। वर्तमान में युवा पीढ़ी कॅरियर को प्रथम प्राथमिकता दे रही है परन्तु विवाह भी महत्वपूर्ण एवं समाजिक आवश्यकता है। अतः छात्राओं को अपने वैवाहिक जीवन में सामंजस्य स्थापित कर सफलता अर्जित करने हेतु यह आयोजन किया गया है। 
डाॅ. अल्का दुग्गल ने बताया कि प्री-मराइटल काउन्सलिंग में विभिन्न पक्षों जैसे- आर्थिक, मूल्यों, निर्णय, समय, आपसी सम्बन्धों, अपेक्षाओं आदि पर बात कर सकते है। 
एक्सपर्ट एवं काउन्सलर डाॅ. शमा हमदानी ने पूर्व विवाह परामर्श के महत्व को बताया कि किस तरह संवाद के माध्यम से वास्तविकता और अपेक्षाओं को मूर्त रूप दिया जा सकता है क्योंकि हर परिवार में कुछ न कुछ असमानताएं होती है जिस परिवार से हमारा सम्बन्ध होता है उसी के अनुसार अपने आपको ढालना चाहिये क्योंकि जितनी जल्दी सामंजस्य स्थापित होगा उतना ही सफल पारिवारिक जीवन होगा। 
छात्राओं ने अपने विचार एवं प्रश्न रखें जैस- कु. सिमरन सिंह ने जानना चाहा कि विवाह की आवश्यकता और वधू से ही सारी अपेक्षाएं क्यों होती है? पायल साहू को वधू के वर के घर जाने पर आपत्ति थी? वर्षा ने विवाह हेतु क्या-क्या तैयारी करने के बारे में जानकारी चाही। कु. एकता कौमार्य ने पूछा कॅरियर एवं घर-परिवार के साथ कैसे सामंजस्य स्थापित करंे? आदि अनेक गंभीर प्रश्न एवं जिज्ञासायें सामने आयी। 
डाॅ. रेशमा लाकेश ने बताया कि प्राचार्य डाॅ. सुशील चन्द्र के मार्गदर्शन में लगातार छात्राहित में ऐसे आयोजन किये जाते है जिसमें रेगुलर कोर्स के साथ-साथ छात्राओं के लिये काउन्सलिंग की जाती है जिससे वे भविष्य में अपने दायित्वों एवं कत्र्तव्यों का उचित निर्वाह कर श्रेष्ठ नागरिक सिद्ध हो सके। 

 

ब्रेस्ट कैन्सर अवेरनस कैम्पेन

शास. डाॅ. वा.वा. पाटणकर कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय की यूथ रेडक्राॅस इकाई द्वारा ब्रेस्ट कैन्सर अवेरनस कैम्पेन चलाया गया जिसमें रेडक्राॅस प्रभारी डाॅ. रेशमा लाकेश ने बताया कि शरीर के किसी अंग में होने वाली कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि कैन्सर का प्रमुख कारण होती है। शरीर में आवश्यकतानुसार यह कोशिकायें बट जाती हैं, लेकिन जब यह लगातार वृद्धि करती है तो कैन्सर का रूप ले लेती है। इस प्रकार स्तन कोशिकाओं में होने वाली अनियंत्रित वृद्धि स्तन कैन्सर का प्रमुख कारण है। कोशिकाओं में होने वाली लगातार वृद्धि एकत्र होकर गांठ का रूप ले लेती है, जिसे कैन्सर ट्यूमर कहते है। ऐसी सम्भावना व्यक्त की जा रही है कि आने वाले समय में यह रोग हमारे देश में महामारी का रूप ले लेगा, परन्तु शाकाहारी, रेशेदार खान-पान फल सब्जियाँ, व्यायाम एवं तेल युक्त मसालेदार भोजन, धुम्रपान, अतिरिक्त नमक, अधिक कैलोरी से परहेज इस रोग से बचाव में सहायक होते है।   
स्तन कैन्सर होने पर पहले या दूसरे चरण में ही इसका पता चल जाने से सही समय पर इसका इलाज सम्भव है, लेकिन इसका पता चल जाना भी जागरूकता पर निर्भर है, इसी उद्देश्य से महाविद्यालयीन छात्राओं के लिये जागरूकता अभियान चलाया गया। जिसमें स्तन कैन्सर से संबंधित समस्त जानकारियाँ जैस- लक्षण, बचाव आदि बताये गये। 
उन्होनें जानकारी दी कि अक्टूबर को पिंकटोबर यानी गुलाबी अक्टूबर भी कहा जाता है क्योंकि यह माह दुनियाभर में ब्रेस्ट कैन्सर के प्रति जागरूकता फैलाने के लिये समर्पित है। रेडक्राॅस वालेन्टियर सोनम सेन ने कहा कि कैन्सर के बारे में बहुत बड़ी समस्या यह है कि ज्यादातर लोगों को लगता है, यह बिमारी हमें नहीं हो सकती है। कु. सौम्या साहू ने बताया कि ब्रेस्ट कैन्सर के अधिकतर प्रकरणों में अनुवांशिकता, जीन, एन्वायरमेन्ट और लाइफस्टाईल प्रमुख कारक है। शिखा शर्मा के अनुसार हर महिला स्वयं परीक्षण कर इस रोग का पता लगा सकती है, इसके पहचान के बारे में लोग जागरूक हो, अपनी जांच नियमित समय पर खुद करें तो मशीन जांचो से पहले ही बिमारी के होने की जानकारी प्राप्त हो सकती है।      
मानसी सेन ने बताया कि लोगों को गलत धारणा भी है कि यह छूत की बिमारी है जो कि खून, चोंट आदि से हो सकती है, अपितु सत्य यह है कि यह शरीर में अपने आप होने वाला रोग है जो कि बीस साल के बाद की किसी भी महिला को हो सकता है। दिव्या ने बताया कि खानपान और लाईफस्टाईल में सुधारकर इसके आशंका को कम किया जा सकता है, इस कैन्सर के सफल इलाज का एकमात्र सूत्र है जल्द पहचान अर्थात् जितनी शुरूआती अवस्था में कैन्सर की पहचान होगी उतना ही सरल, सस्ता, छोटा और सफल होगा। 

 
 
 

यूथरेडक्राॅस की छात्राओं ने दादी-नानी संग दिन गुजारा

शास. डाॅ. वा.वा. पाटणकर कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय की यूथरेडक्राॅस की छात्राओं ने दादी-नानी संग दिन गुजारा, उन्होनें सिर्फ न बातचीत की बल्कि गीत-संगीत एवं नृत्य भी किया। 
नानी श्रीमती माधुरी विश्वास ने छात्राओं को पढ़ाई, कॅरियर को प्रथम प्राथमिकता देने की समझाईश दी। सभी बुजुर्गों ने अपने जीवन के मधुर एवं कटु अनुभव सांझा किये। यूथ रेडक्राॅस प्रभारी डाॅ. रेश्मा लाकेश ने बताया कि महाविद्यालय विगत कई वर्षों से पुलगांव स्थित वृद्धाश्रम से जुड़ा है और छात्रायें नियमित रूप से यहां आकर जन्मदिन एवं विभिन्न त्यौहार मनाती है। उन्होनें कहा कि मानव जीवन, विकास की एक सतत् एवं स्वभाविक प्रक्रिया है, जिसकी लम्बी श्रृंखला माता के गर्भ से प्रारंभ होकर वृद्धावस्था को पार करती हुई मृत्यु को प्राप्त करती है। इसमें वृद्धावस्था जीवन का आखरी एवं अंतिम पड़ाव है। परम्परागत सामाजिक व्यवस्था में वृद्धजनों को आदर एवं सम्मान की दृष्टि से देखा जाता था, परन्तु वर्तमान में बदलती सामाजिक एवं पारिवारिक दशा के कारण अनेक समस्याओं ने जन्म लिया है। 
डाॅ. मीनाक्षी अग्रवाल ने जानकारी दी कि वृद्धजनों की समस्याओं को देखते हुए बालकों तथा महिलाओं की तरह ही, इन्हें भी समाज की कमजोर कड़ी के रूप में प्रत्येक देश में मान्यता प्राप्त हो चुकी है, साथ ही वृद्धावस्था में अनेक समस्यायें संतान के साथ संबंध में तनाव, एकाकीपन, मान-सम्मान एवं सामाजिक प्रतिष्ठा में कमी, आय का कम हो जाना, सक्रिय सेवा से सेवानिवृत्ति, अधिकारों में कमी, खाली समय की उपयोग की समस्या, स्वास्थ्य संबंधी समस्या, क्रियाशीलता में कमी, मानसिक शक्ति क्षीण होना, मानसिक तनाव, अनिद्रा आदि। 
डाॅ. अल्का दुग्गल ने इन समस्याओं का समाधान बताया कि इस अवस्था में सामाजिक सुरक्षा, पेंशन व्यवस्था, वृद्धाश्रम की स्थापना, चिकित्सा सेवा, मनोरंजन, उचित सम्मान एवं सुखद पारिवारिक वातावरण आदि है। 
यूथरेडक्राॅस वालेन्टियर - एकता, ऊषा, सिमरन, पायल साहू, ज्योति यादव, सीमा यादव, आरती, विनु सेन, यामिनी, चित्रलेखा ने अपनी सहभागिता की। 

 

रेडरिबन क्लब का आयोजन एचआईवी संक्रमित को सौहार्द्र एवं प्रेम की जरूरत

शासकीय डाॅ. वा.वा. पाटणकर कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय में छत्तीसगढ़ राज्य एड्स नियंत्रण समिति के तत्वाधान में ‘रेड रिबन क्लब इकाई द्वारा एच.आई.वी. एड्स जागरूकता, के अन्तर्गत विभिन्न प्रतियोगिताएँ आयोजित की गयी। प्रभारी प्राध्यापक डाॅ. रेशमा लाकेश ने बताया कि ‘‘एच.आई.वी. संक्रमण से बचाव’ विषय पर भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गयी। जिसमें छात्राओं ने एच.आई.वी. संक्रमण की जैविक क्रियाओं तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट की सविस्तार चर्चा करते हुए बताया कि सुरक्षा ही उसका प्रमुख बचाव का साधन है। 
शिक्षको, छात्राओं को संबोधित करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. सुशील चन्द्र तिवारी ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जो मृत्यु के आंकड़े दिए है वे चिंतनीय है। एच.आई.वी. संक्रमण हमारे शरीर के सुरक्षातंत्र को खत्म कर देता है जिससे हमारा शरीर छोटी-छोटी बिमारियों से भी नहीं लड़ सकता।
उन्होनें कहा कि एच.आई.वी. संक्रमण कोई छूत की बिमारी नहीं इससे संक्रमित व्यक्ति को अच्छे वातावरण एवं प्रेम की आवश्यकता है। 
भाषण प्रतियोगिता में कु. रूचि शर्मा, कु. सबा मरियम, कु. काजल यादव एवं कु. मधु सिंह को पुरस्कृत किया गया। क्लब द्वारा आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता में कु. शगुप्ता परवीन, कु. शिवानी वर्मन, कु. रीना प्रसाद को पुरस्कार दिया गया। 
एच.आई.वी. संक्रमण एवं एड्स जागरूता पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में कु. लकेश्वरी बंजारे, कु. एश्वर्या श्रीवास्तव एवं कु. वेदिका देवांगन को पुरस्कार दिया गया। 
महाविद्यालय की यूथ रेडक्रास इकाई तथा रेड रिबन क्लब के द्वारा वर्ष भर जागरूकता कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में भी आयोजित किए जाते है। रैली, पोस्टर और जनसंपर्क कर छात्राएँ सक्रिय भागीदारी कर रही है। इस अवसर पर प्राध्यापकगण एवं छात्रायें बड़ी संख्या में उपस्थित थी। 

 
 
 

मेडिकल सेंटर में स्वास्थ्य परीक्षण

शा. डाॅ. वा. वा. पाटणकर कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय में मेडिकल सेन्टर में प्रति सप्ताह नगर के विशेषज्ञ चिकित्सक अपनी सेवाएं दे रहे है। इस सप्ताह डाॅ. जय तिवारी (एम.डी.) ने छात्राओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया तथा चिकित्सीय परामर्श दिया। 
मेडिकल सेंटर प्रभारी डाॅ. रेशमा लाकेश ने बताया कि छात्राओं को विभिन्न स्वास्थ्य जागरूकता की जानकारी के साथ ही चिकित्सीय परामर्श भी सेंटर द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा है। जिसका अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। छात्राओं के हेल्थ कार्ड में उनके स्वास्थ्य संबंधी जानकारी वजन, ऊँचाई, रक्तसमूह, रक्तचाप की जानकारी तो होती ही है साथ ही चिकित्सीय परामर्श का भी उल्लेख रहता है। 
डाॅ. जय तिवारी ने लगभग 50 छात्राओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया तथा सलाह दी। 

 
 
 

एड्स दिवस पर रैली और प्रदर्शनी आयोजित

शासकीय डाॅ. वा.वा. पाटणकर कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय दुर्ग में विश्व एड्स दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा रैली का आयोजन किया गया। रैली को प्राचार्य डाॅ. सुशील चन्द्र तिवारी ने महाविद्यालय परिसर से रवाना किया। 
एड्स से संबंधित सुरक्षा व बचाव के नारे के साथ रैली ने जेल रोड से समीपस्थ इलाकों का भ्रमण किया। रा.से.यो. अधिकारी डाॅ. सीमा अग्रवाल एवं डाॅ. मुक्ता बाखला के निर्देशन पर छात्राओं ने स्लोगन बनाये और जागरूकता अभियान चलाया।
यूथरेडक्रास सोसायटी के द्वारा पोस्टर बनाओ प्रतियोगिता रखी गयी जिसकी प्रदर्शनी लगाई गयी। 
यूथ रेडक्रास के स्वयं सेवकों ने प्रदर्शनी में एड्स से बचाव के विभिन्न सुरक्षात्मक उपायों पर केन्द्रित पोस्टर की जानकारी सभी को दी। 
जागरूकता अभियान के अन्तर्गत यूथ रेडक्राॅस की छात्राओं ने जानकारी दी की रक्त परीक्षण के समय हमेशा डिस्पोजेबल सिरिंज का ही उपयोग किया जावे तथा इस रोग से संबंधित जानकारी रखना तथा सुरक्षा ही बचाव है। 
यथूरेडक्राॅस प्रभारी डाॅ. रेशमा लाकेश तथा रा.से.यो. प्रभारी डाॅ. सीमा अग्रवाल ने जानकारी दी की शीघ्र ही महाविद्यालय में रक्त परीक्षण शिविर का आयोजन किया जावेगा तथा सभी छात्राओं को मेडिकल हेल्थ कार्ड उपलब्ध करा दिया गया है। जिसमें रक्त समूह के साथ स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दी गयी है। 

 
 
 

मेडिकल सेंटर में स्वास्थ्य परीक्षण कैंप

शासकीय डाॅ. वा.वा. पाटणकर कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय दुर्ग में संचालित मेडिकल सेंटर में ‘‘स्वास्थ्य’ जागरूकता एवं परीक्षण अभियान के अंतर्गत कैंप लगाया गया। जिसमें सुप्रसिद्ध स्त्रीरोग विशेषज्ञ डाॅ. संध्या नागरिया ने छात्राओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया एवं चिकित्सीय परामर्श दिया। 
मेडिकल सेंटर प्रभारी डाॅ. रेशमा लाकेश ने जानकारी देते हुए बताया कि महाविद्यालय में स्वास्थ्य जागरूकता अभियान के तहत यह चैथा कैंप था जिसमें स्त्रीरोग से संबंधित परामर्श एवं जांच के लिए स्त्रीरोग विशेषज्ञ डाॅ. संध्या नागरिया उपस्थित थी। 60 छात्राओं को चिकित्सीय परामर्श दिया गया। 37 छात्राओं को निम्न रक्तचाप से संबंधित सलाह दी गयी।  
यूथरेडक्रास के स्वयं सेवकों ने कैंप की व्यवस्था का संचालन किया। मेडिकल सेंटर में चिकित्सीय जांच के अलावा औषधियाँ भी उपलब्ध है। डाॅ. रेशमा ने बताया कि शीघ्र ही नेत्र परीक्षण शिविर भी लगाया जावेगा। इस कैंप में श्रीमती दामिनी साहू चिकित्सा सहायक का सक्रिय योगदान रहा। 

 
 
 

छात्राएँ बनी स्नेह संपदा विद्यालय की सहयोगी

हमारे अंचल में 28 वर्ष पूर्व मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों को स्नेह से सिंचित कर उन्हें स्वस्थ्य पारिवारिक वातावरण देने का प्रयास प्रारंभ किया गया जो निःसंदेह काफी सफल और सुदृढ़ होता गया।
‘स्नेह संपदा विद्यालय’ के रूप में उन बच्चों को अभिभावक मिला जो उनके विकास का एक माईल स्टोन है। 
शासकीय डाॅ. वा.वा. पाटणकर कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय दुर्ग की गृहविज्ञान विभाग एवं यूथ रेडक्राॅस  की टीम ने विगत दिनों इस विद्यालय का भ्रमण किया। छात्राओं ने बच्चों से, शिक्षकों से भेंट कर जानकारी जुटाई और निर्णय लिया कि वे अब नियमित रूप से इस विद्यालय की सहयोगी बनेगी और दिव्यांग बच्चों को शिक्षण, खेल, संगीत, कला, योगा सिखलाएगी। 
विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती पी.आर. सिरके ने बताया कि यह विशेष विद्यालय है, जिसमें 56 छात्र-छात्राएँ अध्ययनरत् हैं। यह विद्यालय ‘डे केयर सेटर, प्री. वोकेशनल सेंटर तथा मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों का ‘शिक्षण केन्द्र’ है।
इस विद्यालय में शैक्षणिक अभ्यास के साथ आत्म स्वावलंबन, कौशल ज्ञान दिया जाता है। इनकी नियमित दिनचर्या में शिक्षण, खेल, संगीत, कला एवं मनोरंजन है।
यूथ रेडक्राॅस प्रभारी डाॅ. रेशमा लाकेश ने बताया कि विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती सिरके ने शास. कन्या महाविद्यालय दुर्ग के प्राचार्य से नियमित रूप से सहयोग की अपेक्षा की थी। 
महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. सुशील चन्द्र तिवारी ने उन्हें आश्वस्त किया कि छात्राओं की टीम स्नेह संपदा विद्यालय के बच्चों को पूरा मार्गदर्शन एवं सहयोग देगी। यह उनके लिए गौरव और प्रेरणास्पद होगा। डाॅ. रेशमा लाकेश ने बताया कि महाविद्यालय में दिव्यांग छात्राओं के प्रोत्साहन के लिए हमेशा प्रयास किए जाते है। 
विगत दिनों अन्र्तविश्वविद्यालयीन युवा उत्सव भोपाल में महाविद्यालय की दो मुकबधिर छात्राएँ कु. केसर बानो एवं कु. फरहीन बानो ने विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व किया। रायपुर स्थित कोपलवाणी महाविद्यालय का यह प्रायोगिक प्रशिक्षण केन्द्र भी रहता है।

छात्राओं का दंत परीक्षण शिविर लगाया गया

शासकीय डाॅ. वा.वा. पाटणकर कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय दुर्ग में मेडिकल सेंटर एवं यूथ रेडक्राॅस सोसायटी के तत्वाधान में दंत चिकित्सा परीक्षण शिविर लगाया गया। स्थानीय रूंगटा दंत चिकित्सा महाविद्यालय के सौजन्य से डाॅक्टरों की टीम ने छात्राओं का दंत परीक्षण किया गया तथा उपचार किया गया। डाॅ. राम तिवारी की पूरी टीम लगातार छात्राओं की दंत चिकित्सीय परीक्षण में मुस्तैदी से जुटी रही। महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. सुशील चन्द्र तिवारी ने शिविर का शुभारंभ करते हुए कहा कि महाविद्यालय में स्थापित मेडिकल सेंटर को शहर के चिकित्सकों का भरपूर सहयोग प्राप्त हो रहा है हम नियमित रूप से विभिन्न विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित कराएगें साथ ही विशेषज्ञों के व्याख्यान एवं जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जावेगें जिससे महाविद्यालय की 2600 छात्राओं को इसका लाभ मिल सके। 

मेडिकल सेंटर प्रभारी डाॅ. रेशमा लाकेश ने जानकारी दी की शिविर में छात्राओं को दंत परीक्षण के साथ उपचार भी मोबाईल वैन में उपलब्ध उपकरणों के द्वारा किया गया। छात्राओं के लिए शीघ्र रक्त परीक्षण एवं सिकल सेल परीक्षण शिविर भी लगाया जा रहा है। महाविद्यालय की सभी छात्राओं का हेल्थकार्ड भी बनाया गया है। इस अवसर पर महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक डाॅ. डी.सी. अग्रवाल ने शिविर व्यवस्था के लिए मार्गदर्शन दिया। यूथ रेडक्रास की स्वयं सेवकों ने रूंगटा काॅलेज के चिकित्सकों डाॅ0 रामकृष्ण, डाॅ0 हीना साहनी, डाॅ0 बाला सुब्रमण्यम, डाॅ0 अभिवनव पटेल के साथ लगातार सक्रिय रही। शिविर में महाविद्यालय के प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों का भी उपचार किया गया। 

शिविर में रूंगटा दंत चिकित्सा महाविद्यालय के तकनीकी स्टाॅफ के साथ व्याख्यातागण भी उपस्थित रहे। विशेषज्ञों ने छात्राओं का दन्त परीक्षण, उपचार के साथ ही कांऊसिंलिंग भी की। इस अवसर पर महाविद्यालय की छात्रायें बड़ी संख्या में दन्त परीक्षण के लिए उपस्थित थी। मेडिकल सेन्टर प्रभारी डाॅ0 रेशमा लाकेश ने शिविर की सफलता के लिये चिकित्सकों, स्वयं सेवकों एवं कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया।  

 
 
 

मेडिकल सेंटर उद्घाटित

शासकीय डाॅ. वा.वा. पाटणकर कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय दुर्ग में छात्राओं को एक सौगात के रूप में मेडिकल सेन्टर की उपलब्धि जुड़ी।
महाविद्यालय में स्थायी रूप से मेडिकल सेंटर प्रारंभ किया गया है जिसमें प्रति सप्ताह चिकित्सक अपनी सेवा एवं परामर्श देगें। सेंटर में स्त्री रोग विशेषज्ञ विशेष रूप से उपस्थित रहा करेगी। 
सेंटर का उद्घाटन दवा व्यवसायी श्री सुधीर अग्रवाल एवं डाॅ. एम.एल. अग्रवाल के करकमलों से आज सम्पन्न हुआ। महाविद्यालय की यूथ रेडक्राॅस सोसायटी की छात्राएँ इस सेंटर का संचालन करेगीं। 
महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. सुशील चन्द्र तिवारी ने बताया कि छात्राओं का नियमित रूप से स्वास्थ्य परीक्षण हो तथा काउंसिलिंग की जावे इसकी व्यवस्था की गई है। समस्त छात्राओं का हेल्थ कार्ड उपलब्ध कराया जा रहा है जिसमें उनका पूरा स्वास्थ्य विवरण अंकित होगा तथा चिकित्सीय परामर्श मिलता रहेगा। 
महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक डाॅ. डी.सी. अग्रवाल ने बताया कि दवा व्यवसायीयों एवं चिकित्सकों के सहयोग से हमने यह सेंटर प्रारंभ किया है जिससे हमारी छात्राओं को उचित मार्गदर्शन मिलेगा। 
मेडिकल सेंटर प्रभारी डाॅ. रेशमा लाकेश ने जानकारी दी की सेंटर द्वारा विभिन्न विषयों पर चिकित्सकों के व्याख्यान भी आयोजित किए जावेगें तथा शिविर के माध्यम से रक्त एवं सिकल सेल परीक्षण, दंत परीक्षण, नेत्र परीक्षण के आयोजन भी होगें। 
उन्होनें बताया कि यूथ रेडक्राॅस की टीम की छात्राओं के लिए प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण दिया जा रहा है जिससे वे अन्य छात्राओं को इसके लिए प्रशिक्षित कर सकेगी। 
कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी, छात्राएँ उपस्थित थी। छात्रसंघ अध्यक्ष कु. सुमन कुशवाहा ने आभार व्यक्त किया। 

 
 
 

स्वाइन फ्लू की दवा का वितरण

शासकीय डाॅ. वा.वा. पाटणकर कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, दुर्ग में यूथ रेडक्रास इकाई के तत्वाधान में डाॅ. मोहन अग्रवाल के सौजन्य से छात्राओं को ‘‘स्वाइन फ्लू’’ की दवा खिलाई गयी। डाॅ. अग्रवाल की उपस्थिति में छात्राओं को स्वाइन फ्लू से बचाव एवं उसके लक्षणों के विषय में जानकारी दी गयी तथा 1500 छात्राओं को दवा खिलाई गई।
इस अवसर पर महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक डाॅ. डी.सी.अग्रवाल, डाॅ.के.एल.राठी,  डाॅ. ऋचा ठाकुर आदि उपस्थित थे। 
 
 
 

मानसिक स्वास्थ्य और मोबाईल पर संवाद

शासकीय डाॅ. वा.वा. पाटणकर कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, दुर्ग के मेडिकल संेटर के तत्वाधान में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत ‘‘मानसिक स्वास्थ्य और मोबाईल’’ विषय पर मनोविशेषज्ञ डाॅ. शमा हमदानी ने छात्राओं से संवाद किया। 
मेडिकल सेंटर प्रभारी डाॅ. रेशमा लाकेश ने जानकरी देते हुए बताया कि राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम में मनोविशेषज्ञ महाविद्यालय के मेडिकल सेंटर में आकर काउंसिलिंग करते है तथा छात्राओं की विभिन्न समस्याओं पर परामर्श तथा सुझाव देते है। स्थानीय अपोलो काॅलेज आॅफ नर्सिंग एवं श्रेयस नर्सिंग काॅलेज भिलाई की मनोविशेषज्ञ एवं काउंसलर डाॅ. शमा हमदानी को महाविद्यालय के सेंटर में मार्गदर्शन हेतु आमंत्रित किया गया।  
 आज के संवाद कार्यक्रम में डाॅ. शमा हमदानी ने ‘मोबाईल’ को लेकर हो रहे मनोविकारों पर चर्चा की उन्होनें बताया कि मोबाईल एडक्शन का फैलाव हो रहा है। मोबाईल गेम के कारण युवा दिग्भ्रमित हो रहे है। एकाग्रता नष्ट हो रही है। 
आँखों में तनाव की वजह से चिड़चिड़ापन और अकेलापन का शिकार नई पीढ़ी हो रही है। डाॅ. हमदानी कहती है कि सेल्फी लेने की आदत तथा डीपी चेंज करने की आदत भी धीरे-धीरे विकार का रूप ले रही है। पढ़ाई के लिए समय नहीं मिल पा रहा है। बार-बार व्यवधान होने से पढ़ाई की एकाग्रता नष्ट हो रही है। 
उन्होनें विभिन्न शोध कार्यों के आधार पर इस पर नियंत्रण करना आवश्यक बतलाया। डाॅ. हमदानी ने छात्राओं को मोबाईल के उपयोग हेतु निश्चित समय सारणी के अनुसार ही प्रयोग करने पर जोर दिया जिससे ज्यादा समय नष्ट न हो और पढ़ाई की जा सके। 
महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. सुशील चन्द्र तिवारी ने भी मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम पर प्रकाश डालते हुए इसे उपयोगी बतलाया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी दुर्ग द्वारा महाविद्यालय में स्थापित काउंसिलिंग सेंटर में माह में दो बार निजी क्लीनिकल साइकोलाॅजिस्ट की उपस्थिति सुनिश्चित की है। जिससे विद्यार्थियों को सतत् रूप से मार्गदर्शन मिल सकेगा और वे अपनी समस्यायें बेझिझक दूर कर सकेंगी। 
इस अवसर पर गृहविज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. अमिता सहगल एवं डाॅ. अल्का दुग्गल, डाॅ. मीनाक्षी अग्रवाल उपस्थित थे। 

 
 
 

नये वर्ष में छात्राओं ने लिया संकल्प नो प्लास्टिक - करेगें पर्यावरण सुरक्षित

शासकीय डाॅ. वा.वा. पाटणकर कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, दुर्ग की छात्राओं ने नये वर्ष में संकल्प लिया कि वे प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करेगीं एवं इसके होने वाले प्रदूषण से पर्यावरण को बचाने जागरूकता अभियान चलाएगी।
यूथरेडक्राॅस की प्रभारी डाॅ. रेशमा लाकेश ने जानकारी देते हुए बताया कि यूथरेडक्राॅस, ग्रीनआर्मी तथा गृहविज्ञान की छात्राओं ने नये वर्ष पर आज संकल्प लिया कि वे प्लास्टिक के बढ़ते प्रदूषण से पर्यावरण को बचाने मुहिम चलाएंगी। अपने परिसर से इसकी शुरूआत की।
 डाॅ. रेशमा लाकेश कहती है पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने के लिए प्लास्टिक एक बहुत बड़ा खतरा बनकर उभरा है। पूरे विश्व में प्लास्टिक का उपयोग इस कदर बढ़ चुका है कि इसके कचरे से पूरी पृथ्वी के चार घेरे बन जाएं। 
हम जो कचरा फेकते है उसमें प्लास्टिक का एक बड़ा हिस्सा होता है। प्लास्टिक नाॅन-बाॅयो डिगे्रडेबल होता है। अर्थात् ऐसे पदार्थ जो बैक्टीरिया के द्वारा ऐसी अवस्था प्राप्त नहीं कर पाते जिससे पर्यावरण को क्षति न पहुंचे। प्लास्टिक की छोटी पाॅलीथीन थैली को नष्ट होने में हजारो वर्ष लगते है। 
नये वर्ष पर छात्राओं ने ‘नो प्लास्टिक’ पर पोस्टर प्रदर्शनी लगायी जिसमें प्लास्टिक के रसायन और उसके दुष्प्रभावों पर चित्र बनाए गए थे। 
महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. सुशील चन्द्रतिवारी ने छात्राओं के इस प्रयास की सराहना की तथा नियमित रूप से पर्यावरण संरक्षण की गतिविधियों को करने तथा हरियाली के लिए सार्थक प्रयास करने का आव्हान किया। महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक डाॅ. डी.सी. अग्रवाल, डाॅ. अनिल जैन, डाॅ. शशि कश्यप, डाॅ. ऋतु दुबे, डाॅ. अल्का दुग्गल, डाॅ. निसरीन हुसैन ने भी छात्राओं को मार्गदर्शन दिया। 

 
 
 

जीवन साथी के चयन का आधार पर - समूह चर्चा आर्थिक आत्मनिर्भरता जरूरी है

शासकीय डाॅ. वा.वा. पाटणकर कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, दुर्ग में स्नातकोत्तर गृहविज्ञान विभाग के तत्वाधान में समूह चर्चा के अन्तर्गत ‘‘वर्तमान में जीवनसाथी के चयन का आधार’’ विषय पर छात्राओं ने अपने बेबाक विचार प्रस्तुत किये।
इस आयोजन की मुख्य वक्ता अंचल की सुप्रसिद्ध इवेंट आॅर्गेनाईजर श्रीमती प्रतिमा तोमर थी। 
गृहविज्ञान की प्राध्यापक डाॅ. रेशमला लाकेश ने जानकारी देते हुए बताया कि समूह चर्चा में छात्राओं ने निःसंकोच अपने विचार प्रस्तुत किये। 
अधिकांश छात्राओं ने कहा कि पारिवारिक पृष्ठभूमि के साथ ही शैक्षणिक स्तर पर ही चयन करना सार्थक रहता है।  वहीं कुछ छात्राओं ने आर्थिक आत्मनिर्भरता को आवश्यक तत्व बताया। उनके अनुसार अच्छी नौकरी या व्यवसाय से आत्मनिर्भरता एवं भविष्य की मजबूत आधारशीला को हम मुख्य मानते है।
एक छात्रा ने इन गुणों के साथ सजातीय एवं आयु अंतराल को भी महत्वपूर्ण माना। उसके अनुसार सामाजिक व्यवस्था को नकारा जाना ठीक नहीं है। 
समूह चर्चा में बीच-बीच में जहाँ विचारों में भिन्नता नजर आई वहीं बहुत ही विचारोत्तेजक तथ्यों पर भी प्रकाश डाला गया। 
एक छात्रा ने कुंडली मिलान को महत्वपूर्ण मानते हुए रक्त समूह के मिलान को भी उचित बताया। उसके अनुसार ज्योतिष विज्ञान काफी समृद्ध है और ग्रहों की मान्यता के बल पर उसे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि कुंडली एवं गोत्र मिलान किया जाना चाहिए। 
इस चर्चा में जीवनसाथी के व्यवहार, आदतों एवं रूचियों को लेकर भी विचार विमर्श हुआ। अधिकांश छात्राओं ने इन बिन्दुओं को जीवन का मजबूत आधार माना। 
मुख्य वक्ता श्रीमती प्रतिभा तोमर ने भी छात्राओं को संबोधित किया और सारगर्भित विश्लेषण किया। इस अवसर पर गृहविज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. अमिता सहगल, डाॅ. अल्का दुग्गल, डाॅ. मीनाक्षी अग्रवाल ने भी अपने विचार सांझा किए तथा मार्गदर्शन दिया।

 
 
 

विश्व एड्स दिवस पर विभिन्न आयोजन सही जानकरी और उचित सावधानी जरूरी:- डाॅ. तमेर

शासकीय डाॅ. वा.वा. पाटणकर कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, दुर्ग में विश्व एड्स दिवस के अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिताएँ एवं विशेषज्ञ चिकित्सक का संवाद रखा गया।
इस अवसर पर आयोजित संवाद कार्यक्रम में शहर की सुप्रसिद्ध चिकित्सक डाॅ. उज्जवल तमेर ने छात्राओं को एड्स के विषय की जानकारी ही नहीं दी बल्कि संवाद के माध्यम से उनके प्रश्नों के जवाब भी दिए। 
डाॅ. तमेर ने बताया कि तमाम वैज्ञानिक विकास के बावजूद आज भी एच.आई.वी.-एड्स एक लाइलाज बीमारी के रूप में कठिन चुनौती बना हुआ है। इससे बचाव का एक ही जरिया है- सहीं और सटीक जानकारी व उचित सावधानी बरतना। 
उन्होनें बताया कि एचआईवी-एड्स के प्रति जागरूकता के अभियानों में सबसे ज्यादा यौन संबंधों को ही टारगेट किया जाता है लेकिन एचआईवी संक्रमण फैलने का केवल यही वजह नहीं है। संक्रमित खून या अन्य रक्त उत्पादों के इस्तेमाल भी कारण होते है।
कार्यक्रम में अपने संबोधन में महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. सुशील चन्द्र तिवारी ने कहा कि एचआईवी संक्रमित व्यक्ति बीमारी से नहीं बल्कि अपने प्रति समाज के रवैये से ज्यादा भयमित एवं दुखी रहता है। यही वजह है कि 75 प्रतिशत एचआईवी पाॅजिटिव व्यक्ति अपने कामकाज की जगह पर अपनी बीमारी की बात छिपाकर रखते है। इसमें लिंग भेदभाव भी दिखाई देता है। इस बिमारी में गलतफहमियाँ, अज्ञानता इसे भयावह रूप दे देती है। 
कार्यक्रम का संचालन करते हुए डाॅ. रेशमा लाकेश ने एड्स के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए यूथ रेडक्राॅस द्वारा चलाये जा रहे है जागरूकता अभियान के विषय में जानकारी दी। 
इस अवसर पर आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता में प्रथम कु. लक्ष्मी देवांगन बी.एससी.-2, द्वितीय कु. तब्बसुम एम.एससी-3 सेमेस्टर एवं तृतीय स्थान कु. पूजा निर्मलकर- बी.ए.-2। 
निबंध प्रतियोगिता में प्रथम कु. सबीना बेगम-बी.एससी-3, द्वितीय रेशमा साहू-बी.एससी-2, तृतीय शिवकली मिरी-बी.एससी-2
भाषण प्रतियोगिता में प्रथम कु. भूमिका तिवारी एम.ए.-अर्थशास्त्ऱ, द्वितीय कु. रानू-बी.एससी-2 तथा तृतीय स्थान पर कु. मधु गौतम एवं शिल्पी शर्मा रहीं। 
यूथ रेडक्राॅस की टीम ने नुक्कड़ नाटक का प्रदर्शन किया जिसमें एड्स से बचाव एवं सावधानियों पर महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदर्शित की। कार्यक्रम में सभी प्रतिभागियों को राज्य एड्स नियंत्रण समिति के द्वारा नगद पुरस्कार दिये गये। 
कार्यक्रम के अंत में डाॅ. रेशमा लाकेश ने आभार प्रदर्शित किया। इस अवसर पर प्राध्यापक एवं छात्राये ंबड़ी संख्या मे ंउपस्थित थी। 

 

मानसिक स्वास्थ्य सबसे महत्वपूर्ण: डाॅ. आकांक्षा दानी

शासकीय डाॅ. वा.वा. पाटणकर कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, दुर्ग में मेडिकल सेन्टर तथा जिला स्वास्थ्य विभाग के तत्वाधान में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अन्तर्गत छात्राओं के मानसिक विकास एवं मानसिक समस्याओं के लिए मार्गदर्शन हेतु सेमीनार का आयोजन किया गया। 
सुप्रसिद्ध मनोविशेषज्ञ डाॅ. आकांक्षा गुप्तादानी ने अपने उद्बोधन में कहा कि मानसिक स्वास्थ्य जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है और महत्वपूर्ण भी है। हम इस पर ध्यान न देकर लापरवाही बरतते है जिससे छोटी-छोटी बातें एक बड़ी गंभीर समस्या का रूप ले लेती है। उन्होनें अवसाद पर विशेष फोकस करते हुए कहा कि किशोर अवस्था में हम उचित मार्गदर्शन एवं सलाह के अभाव में हत्तोसाहित हो जाते है और धीरे-धीरे यह अवसाद का रूप ले लेता है। छात्राएँ ज्यादा इससे प्रभावित हो जाती है। 
डाॅ. आकांक्षा ने बताया की आत्महत्या की घटनाएँ भी छोटी-छोटी सी बातों को लेकर बढ़ रही है।  हमें अपना मनोबल, आत्मविश्वास बढ़ाए रखना है जिसके अभाव में हम अपने अमूल्य जीवन को खो बैठने का दुस्साहस कर बैठते है। मेडिकल सेंटर प्रभारी डाॅ. रेशमा लाकेश ने भी छात्राओं को मानसिक अस्वस्थता के संबंध में विस्तार से बताया और निराकरण के टीप्स दिए। 
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. सुशील चन्द्र तिवारी ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि परीक्षा के समय के तनाव से हम परिचित है जिससे हमें नुकसान ही होता है। उसके लिए वर्षभर समयबद्ध ढंग से पढ़ाई की जावे तो यह तनाव नहीं होगा और आत्मविश्वास बढ़ेगा। इसी तरह जीवन में घटने वाली छोटी-छोटी घटनाओं से घबराए नहीं हर परिस्थिति में मनोबल ऊँचा रख कर ही सफल हो सकते है। 
छात्राओं ने अपनी समस्याओं को विशेषज्ञ से पूछा और उसका निदान प्राप्त किया। इस अवसर पर छात्राएँ, प्राध्यापक बड़ी संख्या में उपस्थित थे। आभार प्रदर्शन डाॅ. लता मेश्राम ने किया।
 

मेगा हेल्थ कैंप का आयोजन

शासकीय डाॅ. वा.वा. पाटणकर कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय दुर्ग में विगत दिनों मेगा हेल्थ कैम्प का आयोजन किया गया। नगर की समाजसेवी संस्था सत्यम शिवम सुंदरम समिति एवं महाविद्यालय की यूथरेडक्राॅस इकाई के तत्वाधान में आयोजित इस कैम्प में हृदयरोग, दंत रोग, नेत्र रोग, स्त्री रोग, सामान्य स्वास्थ्य के विशेषज्ञ चिकित्सक उपस्थित थे। कैंप के संबंध में सुप्रसिद्ध हृदयरोग विशेषज्ञ डाॅ. सुप्रीत चोपड़ा ने बताया कि उनकी संस्था लगातार विभिन्न ग्रामों में तथा स्कूलों एवं महाविद्यालयों में इस तरह के कैम्प आयोजित कर निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण के साथ ही दवाएँ भी निःशुल्क उपलब्ध कराते है। इस कैम्प में सुप्रसिद्ध चिकित्सक डाॅ. आकाश बख्शी, डाॅ. राहुल गुलाटी, डाॅ. रंजन सेनगुप्ता, डाॅ. आकांक्षा श्रीवास्तव, डाॅ. वर्षा ठाकुर, डाॅ. गौरव आदि उपस्थित थे।   
यूथ रेडक्राॅस की प्रभारी डाॅ. रेशमा लाकेश ने बताया कि मेगा कैम्प का छात्राओं को बहुत लाभ मिला। नेत्र विशेषज्ञ से जहाँ नेत्र परीक्षण कराया वहीं डाॅ. सुप्रीत चोपड़ा ने छात्राओं का स्वास्थ्य परीक्षण और काउंसिलिंग भी की। 
सत्यम शिवम सुंदरम समिति के सभी पदाधिकारीयों ने कैम्प की व्यवस्था में लगातार सक्रिय रहें। कैम्प का लाभ महाविद्यालय के प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों ने भी उठाया। 
बीपी, ई.सी.जी. ब्लड शुगर की जांच की भी सुविधा कैम्प में उपलब्ध थी। कैम्प के संचालन में यूथ रेडक्राॅस एवं राष्ट्रीय सेवा योजना तथा ग्रीन आर्मी की छात्राओं के साथ ही स्वास्थ्य सेवा से जुड़े कु. सीमा, अल्पना, खेमलाल, लोमश, मौसमी एवं पूजा तिवारी निरंतर व्यवस्था में लगी रही। महाविद्यालय के प्राचार्य ने समिति का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें सम्मानित किया। 

 
 
 

यूथ रेडक्राॅस ने डेंगू के लिए जागरूकता अभियान चलाया

शासकीय डाॅ. वा.वा. पाटणकर कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, दुर्ग की यूथ रेडक्राॅस सोसायटी की छात्राओं ने अंचल में फैले ‘डेंगू’ के प्रति जागरूकता लाने तथा बचाव के सुरक्षात्मक उपायों पर अभियान शुरू किया है। यूथरेडक्राॅस की टीम ने प्रभारी डाॅ. रेशमा लाकेश के मार्गदर्शन में महाविद्यालय की समस्त छात्राओं को डेंगू से बचाव के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि वे फील्ड में जाकर तथा अपने मोहल्ले व आसपास में इसका प्रचार-प्रसार करें व पानी के जमाव को हटाने व स्वच्छता के लिये प्रेरित कर सकें। 
इस संबंध में महाविद्यालय में पोस्टर प्रदर्शनी भी लगायी गयी है जो डेंगू के लक्षणों, कारणों व उससे बचाव के तरीकों को प्रदर्शित करती है। 
महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. सुशील चन्द्र तिवारी ने बताया कि यूथ रेडक्राॅस व राष्ट्रीय सेवा योजना की छात्राएँ इस अभियान में समर्पित होकर कार्य कर रही है। महाविद्यालय में सुप्रसिद्ध चिकित्सक डाॅ. एम.एल. अग्रवाल के सौजन्य से डेंगू के बचाव के लिये होम्योपैथिक दवा का भी वितरण किया जा रहा है। 

 
 
 

हेल्थ चेकअप कैंप का आयोजन बोन डेसिंटी एवं न्यूरोपैथी की जांच की गयी

शासकीय डाॅ. वा.वा. पाटणकर कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, दुर्ग में मेडिकल सेंटर के तत्वाधान में हेल्थचेकअप कैंप का आयोजन किया गया। इस कैंप में बोनमाॅस डेंसिटी, बाॅडीमास इंडेक्स एवं न्यूरोपैथी की जांच आधुनिक मशीनों से की गयी तथा परामर्श दिया गया। मेडिकल सेंटर प्रभारी डाॅ. रेशमा लाकेश ने जानकारी दी कि नगर के प्रसिद्ध विशेषज्ञ डाॅ. के.सी. भगत एवं डाॅ. अंकिता भगत के सहयोग से एक दिवसीय कैंप का निःशुल्क आयोजन किया गया। जिसमें 140 छात्राओं, शिक्षकों एवं कर्मचारियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया तथा चिकित्सकीय परामर्श दिया गया।
डाॅ. के.सी. भगत ने बताया कि बोनमाॅस डेनसिटी की जांच आधुनिक उपकरणों के माध्यम से की गयी। जिसमें सभी की उम्र, वजन और ऊँचाई के साथ बोनमाॅस डेनसिटी, बाॅडीमास इंडेक्स एवं न्यूरोपैथी टेस्ट किया गया। महिलाओं में 40 की उम्र के बाद कैल्सियम की कमी के कारण हड्डियों में खनिज का घनत्व कम होने से कमर दर्द, पीठ दर्द की शिकायत आम हो गयी है। अब पुरूषों में भी यह लक्षण दिखाई देते है। जांच में पाया गया कि अधिकांश छात्राओं में कैल्सियम की कमी पायी गई तथा ऐनेमिक है। पुरूषों में भी कैल्सियम की कमी पायी गयी।   
न्यूरोपैथी- मशीन के द्वारा पैर के तलुओं से जांच कर ऐड़ी तथा पैर में होने वाली तकलीफ का भी परीक्षण किया गया। मधुमेह के रोगियों में अधिकतर पैरों में इस प्रकार का शिकायत मिलती है। डाॅ. अंकिता भगत ने पोषण एवं आहार प्रबंध पर चिकित्सीय परामर्श भी दिया। 
उन्होनें बताया कि पोषण एवं उचित खानपान से हम कई बिमारियों से बच सकते है और राहत पा सकते है। न्यूरोपैथी तकनीशियन तापस भगत, बोनमास डेनसिटी के तकनीशियन मुकेश कुमार तथा कु. प्रीति ठाकुर ने सतत् रूप से परीक्षण कार्य किया। 
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. सुशील चन्द्र तिवारी तथा महाविद्यालय का स्टाॅफ, छात्राओं ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर शिविर का लाभ उठाया। यूथ रेडक्राॅस की छात्राओं ने कैंप की व्यवस्था का सफल संचालन किया। 

 

काउंसलिंग सेंटर प्रारंभ

शासकीय डाॅ. वा.वा. पाटणकर कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, दुर्ग में स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत काउंसलिंग सेंटर स्थापित किया गया है। जिसका उद्घाटन आज प्राचार्य डाॅ. सुशील चन्द्र तिवारी द्वारा किया गया। सेंटर में छात्राओं को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सेवायें उपलब्ध रहेंगी। इसके लिये विशेष रूप से महाविद्यालय की सहायक प्राध्यापक डाॅ. रेशमा लाकेश एवं सुश्री रिमशा लाकेश को प्रशिक्षण विभाग द्वारा दिया गया है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रत्येक माह में एक बार विशेषज्ञ चिकित्सक द्वारा छात्राओं की मानसिक संबंधी समस्याओं का निवारण किया जायेगा एवं समय-समय पर विशेष कार्यशाला, सेमीनार और मार्गदर्शन कार्यक्रम आयोजित होगें। 
अपने उद्बोधन में प्राचार्य डाॅ. तिवारी ने काउंसलिंग की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होनें बताया कि छात्र-छात्राएँ शिक्षा एवं कैरियर को लेकर अत्यंत तनाव में रहते है। उन्हें शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं के लिये उचित मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। यह केन्द्र छात्राओं को स्वास्थ्य संबंधी जानकारियाँ उपलब्ध करायेगा। 
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापक डाॅ. यशेश्वरी धु्रव, डाॅ. मुक्ता बाखला,     डाॅ. निसरीन हुसैन, डाॅ. साधना पारेख, डाॅ. ज्योति भरणे, डाॅ. योगेन्द्र त्रिपाठी एवं काउंसलिंग सेंटर की संचालक डाॅ. रेशमा लाकेश एवं रिमशा लाकेश एवं यूथ रेडक्राॅस की छात्रायें उपस्थित थे।